अंदर वाला कमरा
आदम गहन घने जंगलों से बाहर निकल कर पहली बार जब खुले आसमान के नीचे खड़ा हुआ तो उसके समझ में आया की धरती की एक छत है और वो नीले रंग की है और बहुत दूर है और बहुत ऊँची है। उसने कूद कर उसको छूने की कोशिश की पर वो छोटा रह गया। आगे जाकर जब सभ्यता का विकास हो जाएगा तो आदम वापस कोशिश करेगा आसमान को छूने की, पर इस बार वो आसमान में हवाई जहाज़ उड़ा कर या कोई कविता लिख कर उसको छूने की हिम्मत करेगा, और नहीं छू पाएगा, आसमान बहुत दूर है और बहुत ऊँचा और कोई भी भाषा या लिपि या जहाज़ उसको नहीं छू सकता, और वो वापस छोटा रह जाएगा।
अब आदम को आसमान में एक आग का एक गोला भी दिखा जो उसने पहले नहीं देखा था, सिर्फ़ महसूस किया था। अब उसने आग के गोले को देखा, कोशिश की, और उसकी आँखें जलने लगी और उसने पहली बार अनुभव किया कि उसकी आँखों से पानी निकल सकता है, और वो पहली बार रोया और बहुत रोया । उसने उस दिन समझ लिया की ये आग का गोला कुछ दिव्य है, इसमें एक चीज़ है जो उसको गहन उदासी से भर देती है और वो घंटों तक रोता रहता और इस दौरान उसने महसूस किया कि उसको जंगल की याद आने लगी पर वो वापस उस जंगल में वापस नहीं जा सकता था, वापस जाना आदमजात की मौत है और अगर वो उस दिन वापस चला जाता तो उसके साथ हमारी पूरी सभ्यता उसके साथ मर जाती, कोई भाषा, कोई लिपि नहीं बनती, हम कभी प्रेम के बारे में नहीं लिख पाते और ये शायद अच्छा भी होता, पर वो वापस नही गया ।
पर वो ऐसे नहीं रह सकता था, आदम चालाक था, जंगल के जानवरों से तो चालाक था ही तभी आज उसको मालूम था की आसमान नीला है और वो गहरे जंगल से बाहर है, शायद पंछियों से चालाक नहीं। जब वो जंगल में रहता था तो वो सोचता था कि पंछी कहाँ से आते है, कहाँ जाते है, पर अब उसने जब पंछियों का एक झुंड आसमान में उड़ते देखा तो उसको बहुत कुछ समझ में आया कि पंछी अभी भी उससे ज़्यादा चालाक है क्यूँकि वो उड़ सकते है और आसमान को पास से देख सकते है, पर पंछियों का अलग आसमान है ये उसको नहीं मालूम था, उन पंछियों का आसमान धरती है जिस पर आदम खड़ा हुआ था, उसके पैरो के नीचे किसी का आसमान था और उसको ये मालूम नहीं था।
आदम ने घर बनाने शुरू किए, क्यूँकि वो इस आग के गोले से दूर भागना चाहता था, वो चाहता वो की वो आसमान को देखे पर उसमें ये आग का गोला ना हो, सिर्फ़ नीला आसमान हो बहुत दूर तक, और वो उसको दिन भर देखता रहे। उसने घर इस तरह से बनाया की उसमें दो कमरे थे, एक बाहर वाला कमरा और एक अंदर वाला कमरा। बाहर वाले कमरे से आग का गोला दिखाई देता था और अंदर वाले कमरे से सिर्फ़ आसमान दिखता था। अंदर वाले कमरे में उसको वापस वैसे महसूस होता जैसे वो जंगल में है पर उसकी जान को ख़तरा नहीं है, सिर्फ़ आग के गोले की रोशनी और नीला आसमान। जब उसका घर बन गया तो वो बहुत ख़ुश हुआ और अंदर वाले कमरे से बैठ कर दिनभर आसमान को देखता रहता, ये आदमजात की ज़िंदगी का सबसे अच्छा समय था। उसको रोना बिलकुल भी पसंद नहीं था।
सभ्यता का विकास हुआ और अब लोग शहरों में रहने लगे, लोगों के घर होते और जिसके घर में जितने ज़्यादा अंदर वाले कमरे वो उतना ही अमीर। गरीब आदमी के पास बाहर वाला कमरा भी नहीं होता और वो दिन भर इस आग के गोले से बचने के लिए कोई छाया ढूँढता रहता और दिनभर रोता। अमीर आदमी सिर्फ़ रात में घर से बाहर निकलता, जब आग का गोला आसमान से जा चुका होता। अमीर बाहर निकलते, भांग, शराब पीते, नाच गाने के आनंद प्राप्त करते और सुबह होने से पहले घर लौट आते क्यूँकि अमीर लोगों को आग के गोले को देखना और रोना बिलकुल भी पसंद नहीं था, रोने का अधिकार गरीब तबके के लोगों के लिए सुरक्षित था और हो भी क्यूँ ना।
चंदू के घर में 12 अंदर वाले कमरे थे। चंदू का बाप शहर का सबसे पुराना सेठ था। चंदू का पूरा समय आसमान को देखने में गुजरता जो की आज भी, 13 लाख साल बाद भी, आज भी अगर सबसे ज़्यादा सुख किसी चीज़ में था तो वो आसमान देखने में था और चंदू सुबह जागने के बाद आसमान देखना शुरू करने से पहले भांग पीना पसंद करता था, इससे उसको ज़्यादा और भी ज़्यादा आनंद आता। चंदू ने आसमान के बारे में खूब कहानी पढ़ी थी की आसमान के परे एक जगह है जहां आग का गोला नहीं है और जहां पर वो दिन में भी बाहर जा सकता है और रोशनी में दुनिया देख सकता है। चंदू को रात में बाहर जाना पसंद नहीं था। दुनिया को अंधेरे में देखने का ख़्याल इतना तेज नहीं था की उसको घर से बाहर निकल सके। जब वो जवान था तो रात में अपने दोस्तों के साथ बाहर ज़ाया करता था, पर रात के अंधेरे में सिर्फ़ नशा था, और बहुत अंधेरा और अंधेरे के बाद और घना अंधेरा, रोशनी लेकर वो इस अंधेरे को चीरते हुए थोड़ी दूर तो गया पर वापस घर लौट आया, अब वो दिनभर अंदर वाले कमरे से आसमान को देखता और भांग पीता और किताबें पढ़ता, चंदू लिखता भी था जब उसका मन होता, चंदू ख़ुश था जैसे आदम को होना चाहिए था।
पर फिर भी चंदू कभी कभी घर से बाहर निकलता, रात में, पर नशे करने या किसी के नाच में खुद को खोने नहीं, वो चाहता था किसी को ढूँढना, किसी फ़क़ीर से मिलना, जो उसको आसमान के परे जाने की कोई तरकीब बात दे, कहीं तो कोई रास्ता था, उसको भरोसा था, और वो कुछ भी करके उस रास्ते का पता लगाएगा। आज चंदू वापस घर से बाहर निकला , चंदू को किसी ने बताया की एक फ़क़ीर है जो दिनभर बाहर घूमता है, उसका ना कोई घर है ना ही कोई अंदर वाला कमरा और वो फिर भी कभी नहीं रोता, वो हँसता रहता है और आग के गोले से नही डरता। चंदू ने जब उसके बारे में सुना तो उसको लगा की उसके मुँह पर किसी ने थूक दिया हो, क्या फ़ायदा उसकी अमीरी का? पर चंदू संभला और उसको समझ में आया की ये फ़क़ीर कोई आम आदम नहीं है और वो उसको ढूँढ कर ही रहेगा।
चंदू घर से निकला और उसको वो फ़क़ीर मिला। शहर से बहुत दूर, एक पेड़ के नीचे वो फ़क़ीर बैठा हुआ था, ध्यान में, चंदू को पहले लगा की वो कोई मूर्ति है, उसकी साँस बहुत ही हल्की और धीमी जैसे की वो कभी रुक गयी तो किसी का ध्यान नहीं जाएगा और लोग उसके शरीर को पत्थर की मूर्ति समझ कर उसपर फूल प्रसाद चढ़ाने लगेंगे। पर उसकी साँस अभी रुकी नहीं थी, अभी रुक भी नहीं सकती थी, चंदू उसको रुकने नहीं देगा, जब तक वो फ़क़ीर चंदू को कुछ बता नहीं देता, कुछ भी।
चंदू उसके पास जाके बैठा और जिससे पहले की चंदू कुछ बोल पता फ़क़ीर ने आँखें खोली और बोला:
“अंदर खोदता रह, धीमे धीमे, बिना कुछ बोले, और सब मिल जाएगा”
चंदू घर लौट आया, वो उसको मालूम था उसको क्या करना है वो घर आया, उसने थोड़ा गाँजा पिया और वो सो गया।
अगले दिन चंदू सोकर जागा और उसने अंदर वाला कमरा खोदना शुरू किया। चंदू को मालूम था कि ये काम उसको चुपचाप करना है, किसी को बिना बताए, तो वो दिन में खोदता जब उसके सब घर वाले सो रहे होते और खुदाई से निकली मिट्टी को छोटी छोटी थैलियों में भरकर रात में घर से बाहर फेंक कर आता। चंदू ने महीनों तक खोदा, हर दिन, वो सुबह जागता और अपना अंदर वाला कमरा खोदता और शाम तक मिट्टी को छोटी छोटी थैलियों में भरकर रखता और वो ऐसा करता रहा, 3-4 महीने तक। चंदू को नहीं पता था की उसको कितना खोदना है पर उसको पता था की एक दिन उसको एक रास्ता दिखेगा जो उसको आसमान के परे ले जाएगा, और वो इस दुनिया को या इससे भी सुंदर एक दुनिया को रोशनी में देख पाएगा, ये सोच सोच कर चंदू को बहुत अच्छा लगता, उसको लगता की वो एक पेड़ की पत्ती है जो टूट कर इस ब्रह्मांड में मिल जाएगी, हमेशा के लिए स्वतंत्र, भले ही इसके अवस्था को पाने में पत्ती की मौत ही क्यूँ ना हो जाए।
पर चंदू की भी एक सीमा था, चंदू आदम था, चंदू टूट सकता था, और भांग का नशा भी अब टूटने लगा था, चंदू को लगता था की वो ये सब ऐसे ही कर रहा है, उस फ़क़ीर ने चंदू के साथ धोखा किया है, चंदू ने अब खोदना बंद कर दिया था और वो अंदर वाले कमरा में बैठा रहता और कमरे के बीचोंबीच में एक बहुत बड़ा गड्डा, चंदू को बहुत बार लगता की वो इस गड्डे में समा जाए वो मिट्टी में खुद को दफ़ना दे, फिर शायद वो आसमान के परे चले जाएगा, फिर शायद उसको मुक्ति मिल जाएगी, फिर वो दिन में घर से बाहर निकल सकेगा और वो भी बिना आँसू बहाए। चंदू को घुटन महसूस होने लगी, अभी दिन हो रहा था पर चंदू को उस फ़क़ीर को ढूँढ कर उसको 2-4 थप्पड़ रसीद करने का मन हुआ, चंदू का मन घृणा और ग़ुस्से से भरने लगा। चंदू ने इतना असहाय कभी महसूस नही किया था और करता भी क्यूँ, चंदू अमीर था।
और चंदू घर से निकल भागा, अभी दिन की रोशनी थी फिर भी वो घर से निकल भागा। जैसे ही वो घर से बाहर निकला उसकी आँखों से आँसू झड़ने लगे और उसने पहली बार जीवन में महसूस किया की गरीब होना क्या होता है, क्यूँ रोना इतना बुरा समझा जाता है, चंदू इधर से उधर भागता रहा और उसको वो फ़क़ीर उसी पेड़ के नीचे बैठा मिला, बिलकुल उसी अवस्था में जैसा उसने पहले उसको देखा था पर इस बार उसके आगे कुछ फूल पत्ती रखे हुए थे और अगरबत्ती जल रही थी। वो मर गया था!! उस धोखेबाज फ़क़ीर ने समाधि ले ली, वो भाग गया था इस संसार से, जिसमें सिर्फ़ दुःख है और कुछ नही, चंदू भी भाग जाता अगर भाग पाता तो, और लोग उसको बुद्ध समझ कर उसके आगे फूल पत्ती चढ़ा रहे है?? चंदू को बहुत ग़ुस्सा आया, उसके आगे के फूल प्रसाद को अपने हाथों से दूर फेंक दिया, दिया बुझा दिया और दौड़ता हुआ घर वापस आ गया, अपने अंदर वाले कमरे में, उसके आँसू रुक गये थे, वो बहुत थका हुआ था और उसको नींद आ गयी।
चंदू दूसरे दिन सोकर जागा, चंदू ने भांग पी और बहुत महीनों के बाद आसमान को देखा, उसको समझ में आ गया था कि, अंदर बाहर सब एक ही जैसा है, कहीं कुछ खोदने या भरने को नही है, बस भांग पियो और अंदर वाले कमरे से आसमान को देखो।

